
सीधी। जी हां यह आश्चर्यजनक हो सकता है किंतु सत्य है। भारत सरकार ने मनरेगा के तहत वित्तीय वर्ष 2020-21 में ₹190 प्रतिदिन और 2021-22 में 193 रुपए प्रतिदिन मजदूरी का निर्धारण किया गया था किंतु भारत सरकार के नियमों को ठेगा दिखाते हुए रोजगार सहायक और सचिवों द्वारा किस तरह मजदूरी का भुगतान किया गया इसका नमूना देखिए।
![]()
![]()
आदिवासी बाहुल्य विकासखंड क्षेत्र कुसमी अंतर्गत ग्राम पंचायत कारैल मैं जॉब कार्ड क्रमांक एमपी- 15-007-037-009 /163-A जो छोटे पिता रामा निवासी ग्राम चंदरसा के नाम पर है जिसमें छोटे और उनकी पत्नी अनारकली का नाम दर्ज है।
दिसंबर 2021 में 12 दिन और जनवरी व फरवरी 2022 में 86 दिन कुल 98 दिनों के लिए 18806 रुपए का भुगतान किया गया है वहीं 1 अप्रैल 2022 से 22 मई 2022 के बीच 99 दिन किए गए काम के लिए 20092 रुपए का भुगतान किया गया है। इस तरह महज एक दिन की मजदूरी 1286 रुपए का भुगतान हुआ है।
रोजगार सहायक द्वारा बनाए गए जॉब कार्ड की बात करें तो जॉब कार्ड में लगी फोटो में छोटे भी वही है और अनारकली भी वही है जबकि हकीकत में ग्राम चंदरसा में दोनों नहीं है। मतदाता सूची के अनुसार ग्राम चंदरसा में छोटे , रामा और अनारकली नाम का कोई भी व्यक्ति ना तो पहले कभी था और ना आज है यह केवल रोजगार सहायक सह प्रभारी सचिव शिव प्रसाद यादव के दिमाग की उपज है जिसने इस तरह के फर्जी नाम और पतो इस्तेमाल कर करोडो रुपए के फर्जीवाडे को अंजाम दिया है। इस बात की पुष्टि जॉब कार्ड में लगे तस्वीरों से साफ होती है।
आदिवासी बाहुल्य विकासखंड क्षेत्र कुसमी अंतर्गत ग्राम पंचायत कारैल मैं जॉब कार्ड क्रमांक एमपी- 15-007-037-009 /163-A जो छोटे पिता रामा निवासी ग्राम चंदरसा के नाम पर है जिसमें छोटे और उनकी पत्नी अनारकली का नाम दर्ज है।






